शास्त्र के अनुसार, भय के बिना
ज्योतिषीय विचार शास्त्रीय परंपरा के अनुसार किया जाता है। उद्देश्य भय उत्पन्न करना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन एवं सकारात्मक दिशा प्रदान करना है।
परिचय
आचार्य कृष्ण कांत श्रीमुख शांडिल्य जी महाराज ज्योतिष, आध्यात्मिक मार्गदर्शन एवं सनातन धार्मिक परंपराओं के क्षेत्र में लगभग 20 वर्षों के अनुभव से जुड़े हुए हैं। वे ज्योतिषीय परामर्श के साथ विभिन्न धार्मिक कथाओं, पूजा-पाठ एवं वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

आचार्य जी
ज्योतिष एवं सनातन धार्मिक अनुष्ठान विशेषज्ञ
आचार्य कृष्ण कांत श्रीमुख शांडिल्य जी महाराज ज्योतिष, आध्यात्मिक मार्गदर्शन एवं सनातन धार्मिक परंपराओं के क्षेत्र में लगभग 20 वर्षों के अनुभव से जुड़े हुए हैं। वे ज्योतिषीय परामर्श के साथ विभिन्न धार्मिक कथाओं, पूजा-पाठ एवं वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
ज्योतिषीय परंपराओं, मंत्र-जप, पूजा-विधि एवं धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से वे श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा, श्री राम कथा एवं देवी भागवत कथा का आयोजन, तथा नवग्रह शांति, यज्ञ, महामृत्युंजय जाप, त्रिपिंडी श्राद्ध एवं भूमि पूजन जैसे अनुष्ठान उनकी प्रमुख सेवाओं में सम्मिलित हैं।
उनका उद्देश्य सनातन धर्म की परंपराओं, वैदिक संस्कारों और आध्यात्मिक ज्ञान को लोगों तक पहुँचाना तथा धार्मिक आयोजनों को विधि-विधान एवं श्रद्धा के साथ संपन्न कराना है।
20+
वर्षों का अनुभव
3
प्रमुख कथाएँ
6
सेवा श्रेणियाँ
8
पूजा एवं अनुष्ठान
विशेष संदेश
“ज्योतिष केवल भविष्य जानने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को समझने, आत्मचिंतन करने और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की एक प्राचीन ज्ञान-परंपरा है।”
— आचार्य कृष्ण कांत श्रीमुख शांडिल्य जी महाराज
कार्य पद्धति
ज्योतिषीय विचार शास्त्रीय परंपरा के अनुसार किया जाता है। उद्देश्य भय उत्पन्न करना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन एवं सकारात्मक दिशा प्रदान करना है।
पूजा, यज्ञ एवं जप परंपरागत विधि से सम्पन्न कराए जाते हैं। सामग्री, संकल्प एवं विधि की जानकारी यजमान को पहले ही दे दी जाती है।
कथा की गति एवं भाषा ऐसी रखी जाती है कि परिवार के सभी सदस्य कथा के भाव से सहज जुड़ सकें।
प्रक्रिया
01
जन्म तिथि, समय एवं स्थान। कथा अथवा अनुष्ठान हेतु प्रस्तावित तिथि एवं स्थान बताएँ।
02
कुंडली का ज्योतिषीय अध्ययन, अथवा आयोजन की विधि एवं व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा।
03
संकल्प, विधि एवं मंत्र-जप के साथ पूजा, यज्ञ अथवा कथा का शास्त्रोक्त आयोजन।