10 अगस्त 2026
मंगल दोष — भय नहीं, विचार का विषय
कुंडली में मंगल की स्थिति वास्तव में क्या दर्शाती है, और शांति पूजा किन परिस्थितियों में विचारणीय होती है।
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आचार्य जी
ज्योतिष एवं सनातन धार्मिक अनुष्ठान विशेषज्ञ
आचार्य कृष्ण कांत श्रीमुख शांडिल्य जी महाराज ज्योतिष, आध्यात्मिक मार्गदर्शन एवं सनातन धार्मिक परंपराओं के क्षेत्र में लगभग 20 वर्षों के अनुभव से जुड़े हुए हैं। वे ज्योतिषीय परामर्श के साथ विभिन्न धार्मिक कथाओं, पूजा-पाठ एवं वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
उनका उद्देश्य सनातन धर्म की परंपराओं, वैदिक संस्कारों और आध्यात्मिक ज्ञान को लोगों तक पहुँचाना तथा धार्मिक आयोजनों को विधि-विधान एवं श्रद्धा के साथ संपन्न कराना है।
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वर्षों का अनुभव
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प्रमुख कथाएँ
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सेवा श्रेणियाँ
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पूजा एवं अनुष्ठान
सेवाएँ
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सभी सेवाएँYouTube लाइव
ज्योतिष जिज्ञासा समाधान
सायं 8:00
श्रीमद्भागवत कथा
सायं 7:30
सत्संग एवं आरती
सायं 6:00
अनुभव
“आचार्य जी ने हमारे जयपुर के घर पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया। परिवार के हर सदस्य ने — दादी से लेकर बच्चों तक — पूरी कथा में बैठकर सुनी। वर्णन इतना सहज और हृदयस्पर्शी था कि लगा जैसे अपने ही बड़े बुज़ुर्ग से बात हो रही हो। ऐसी शांति किसी कथा में पहले कभी अनुभव नहीं हुई।”

रमेश शर्मा
जयपुर, राजस्थान
“मुझे करियर और विवाह को लेकर बहुत उलझनें थीं। जब आचार्य जी से कुंडली परामर्श लिया तो उन्होंने बिना किसी भय के, शांति से हर पहलू समझाया। दशा एवं ग्रह स्थिति पर उनके मार्गदर्शन ने मुझे सकारात्मक दिशा दी। आज मेरे निर्णयों में बहुत अधिक विश्वास है।”

प्रिया अग्रवाल
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
“परिवार में वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ चल रही थीं। किसी ने नवग्रह शांति पूजा का सुझाव दिया। आचार्य जी ने हमारी कुंडलियाँ देखीं, ग्रह दोष स्पष्ट रूप से समझाया और पूर्ण विधि-विधान से पूजा सम्पन्न कराई। कुछ ही महीनों में घर का वातावरण हल्का महसूस हुआ। उनके मार्गदर्शन एवं निष्ठा के लिए आभारी हैं।”

सुरेश एवं कविता मीणा
जोधपुर, राजस्थान
“नये मकान के निर्माण से पूर्व बेटी के भूमि पूजन के लिए आचार्य जी से संपर्क किया। उन्होंने यज्ञ एवं अनुष्ठान का हर चरण पहले से समझाया, सामग्री की सूची पूर्व में साझा की और पूरा अनुष्ठान इतनी श्रद्धा से सम्पन्न कराया कि पूरे परिवार ने धन्य अनुभव किया। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए अवश्य संपर्क करें।”

दिनेश गुप्ता
अजमेर, राजस्थान
क्षण
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ज्ञान
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लेख पढ़ेंजिज्ञासाएँ
तिथि एवं स्थान की उपलब्धता के अनुसार, सामान्यतः कुछ सप्ताह पूर्व संपर्क करना उचित रहता है। आयोजन की अवधि, स्थान एवं व्यवस्था पहले से निर्धारित कर ली जाती है।
जन्म तिथि, जन्म समय एवं जन्म स्थान — तीनों आवश्यक हैं। यदि जन्म समय ज्ञात न हो तो कृपया बता दें; उसी के अनुसार विचार किया जाता है।
कुंडली में ग्रह स्थिति एवं दशा के आधार पर विचार कर पूजा का निर्णय लिया जाता है। पूजा से पूर्व सामग्री की सूची एवं विधि साझा कर दी जाती है।
त्रिपिंडी श्राद्ध सामान्यतः तीर्थ स्थल अथवा मंदिर में सम्पन्न कराया जाता है। तिथि एवं स्थान का निर्धारण संकल्प के समय किया जाता है।
जी हाँ। नवीन भवन अथवा भूमि हेतु भूमि पूजन, तथा परिवार के मांगलिक अवसरों पर वैदिक विधि से अनुष्ठान कराए जाते हैं।