सुलतानपुर से लगभग 60 किमी
प्रतापगढ़ में कथा एवं पूजा हेतु पंडित जी
प्रतापगढ़ सुलतानपुर से लगभग 60 किमी, समीपवर्ती जनपद है — पूजा अथवा एक दिवसीय अनुष्ठान उसी दिन संपन्न कर लौटा जा सकता है, और कथा हेतु केवल तिथियाँ सुरक्षित करनी होती हैं।
यहाँ के निवेदन नगर से अधिक ग्रामों से आते हैं, और इससे एक बात आरंभ में ही तय कर लेनी होती है — ग्राम में कथा हॉल की अपेक्षा प्रायः खुले में अथवा पंडाल में होती है, जिससे व्यास पीठ की ऊँचाई तथा बैठक एवं ध्वनि की व्यवस्था निर्धारित होती है। प्रयागराज निकट है, अतः पितृ कर्म पूछने वाला परिवार प्रायः घर के कर्म का नहीं, संगम का ही निवेदन कर रहा होता है।
यात्रा सड़क मार्ग से होती है और इसकी व्यवस्था यहीं से की जाती है। यदि स्थान ग्राम में हो तो तिथियों के साथ मार्ग तथा वाहन कहाँ तक पहुँच सकता है, यह भी बता दें — यह प्रथम प्रातः की अपेक्षा तभी सरलता से तय हो जाता है।
प्रतापगढ़ में प्रायः आयोजित

श्रीमद्भागवत कथा
सप्ताहिक अथवा सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा — घर, मंदिर एवं सामुदायिक सभागार में शास्त्रोक्त विधि से।

त्रिपिंडी श्राद्ध एवं महामृत्युंजय जाप
त्रिपिंडी श्राद्ध तथा महामृत्युंजय मंत्र जाप — पितृ एवं आरोग्य से संबंधित अनुष्ठान।

नवग्रह एवं ग्रह शांति पूजा
नवग्रह शांति, ग्रह शांति पूजा एवं मंगल दोष शांति पूजा — शास्त्रोक्त विधि एवं मंत्र-जप के साथ।