ज्योतिष परामर्श

विवाह हेतु कुंडली मिलान (गुण मिलान)

विवाह हेतु अष्टकूट गुण मिलान — नाड़ी, भकूट एवं मंगल के विचार सहित, दोनों कुंडलियों का समग्र अध्ययन।

दोनों कुंडलियों का अष्टकूट गुण मिलान, छत्तीस गुणों के साथ नाड़ी, भकूट एवं मंगल दोष का विचार। दोनों परिवार विवरण भेजते हैं; प्रत्यक्ष अथवा ऑनलाइन।

इसमें सम्मिलित

  • अष्टकूट के छत्तीस गुणों की कूटवार गणना
  • नाड़ी एवं भकूट का शास्त्रोक्त अपवादों सहित विचार
  • दोनों कुंडलियों में मंगल दोष का विचार
  • दोनों के सप्तम भाव, नवांश एवं आगामी दशाएँ
  • गुण-अंक क्या कहता है और क्या नहीं — स्पष्ट शब्दों में

अधिकांश परिवारों तक कुंडली मिलान एक अकेले अंक के रूप में पहुँचता है। किसी ने दोनों के जन्म विवरण किसी ऐप में डाल दिए, और वह संदेश दोनों कुंडलियों से कहीं तेज़ गति से परिवार में फैल जाता है — बाईस गुण मिले, तो सब ठीक; चौदह मिले, तो बात समाप्त। कुंडली मिलान उस अंक से अधिक है, और किसी निर्णय से कम। अष्टकूट के छत्तीस गुण दोनों चंद्रमाओं की तुलना करते हैं। वास्तविक मिलान दोनों कुंडलियों को समग्र रूप से पढ़ता है — दोनों के सप्तम भाव, मंगल, आगे आने वाली दशाएँ — और तब उस अंक को उसी विचार के भीतर रखता है। मैं दोनों कार्य करता हूँ, और स्पष्ट बताता हूँ कि कौन सी बात किस विधि से निकली।

अष्टकूट क्या नापता है

अष्टकूट गुण मिलान वर और कन्या की चंद्र राशियों तथा जन्म नक्षत्रों को आठ कूटों पर परखता है। इनके अंक मिलाकर छत्तीस होते हैं:

  • वर्ण — 1
  • वश्य — 2
  • तारा — 3
  • योनि — 4
  • ग्रह मैत्री — 5
  • गण — 6
  • भकूट — 7
  • नाड़ी — 8

ये सभी कूट चंद्र पर आधारित हैं। लग्न, सप्तम भाव, मंगल और दशाएँ इन छत्तीस गुणों के भीतर नहीं आते। यह विधि का दोष नहीं; यही कारण है कि इस विधि को कभी अकेले प्रयोग के लिए नहीं रचा गया।

अठारह गुण देहली है, निर्णय नहीं

प्रचलित नियम है कि छत्तीस में से अठारह गुण न्यूनतम हैं, और उससे ऊपर के खंड मध्यम, उत्तम तथा श्रेष्ठ कहे जाते हैं। यह नियम एक अंक को छाँटता है; विवाह की भविष्यवाणी नहीं करता। सोलह गुण वाला वह जोड़ा जिसके दोनों सप्तम बलवान हों, गुरु सहायक हों और मंगल का कोई प्रश्न न हो, उस जोड़े से 'कमज़ोर मिलान' नहीं जिसके तीस गुण हों किंतु सप्तम निर्बल हो और विवाह के आरंभिक वर्षों में कठिन दशा आने वाली हो। जो परिवार अंक पर रुक जाते हैं, वे एक बड़ी पुस्तक का केवल एक पृष्ठ पढ़ रहे होते हैं। मैं अंक बताता हूँ, क्योंकि आप उसी के लिए आए हैं। फिर यह बताता हूँ कि दोनों कुंडलियाँ और क्या कहती हैं।

नाड़ी दोष और भकूट दोष

नाड़ी

नाड़ी सत्ताईस नक्षत्रों को तीन वर्गों में बाँटती है — आदि, मध्य और अंत्य। यदि दोनों के चंद्र एक ही वर्ग में हों, तो इस कूट में आठ में से शून्य अंक मिलता है, और इसे नाड़ी दोष कहा जाता है। आठ अंक सबसे बड़ा एकल कूट है, अतः यह योग को भारी रूप से गिरा देता है। परंपरा इसे गंभीरता से लेती है; इसे प्रकृति की अति-समानता के रूप में पढ़ा जाता है। वही परंपरा इसके अपवाद भी लिखती है — उदाहरणार्थ, नक्षत्र एक हो किंतु राशियाँ भिन्न हों। जहाँ दोष है, मैं उसका नाम लेता हूँ; जहाँ अपवाद लागू होता है, उसका भी। दोनों में से किसी का उपयोग डराने के लिए नहीं करता।

भकूट

भकूट दोनों चंद्र राशियों के बीच की दूरी देखता है। 6/8 और 2/12 की दूरी भकूट दोष मानी जाती है, और इसमें सात में से शून्य अंक मिलता है। जब उन दोनों राशियों के स्वामी परस्पर मित्र हों, अथवा कुंडलियों के अन्य बल इसकी पूर्ति करें, तो शास्त्र इस दोष को मृदु मानते हैं। 'राशियाँ नहीं मिलतीं' — यह वाक्य इसी कूट से जन्म लेता है। इसका संबंध चंद्र राशियों से है, पत्रिकाओं के सूर्य-राशिफल से नहीं।

मांगलिक मिलान एक पृथक् प्रश्न है

मंगल दोष आठ कूटों में से एक नहीं। वह न छत्तीस में जुड़ता है, न उनसे घटता है। उसका विचार प्रत्येक कुंडली में अलग से होता है — लग्न से प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल, और अनेक विद्वानों के मत में चंद्र तथा शुक्र से भी। उन्हीं शास्त्रों में इसके परिहार भी वर्णित हैं — मंगल का स्वराशि अथवा उच्च राशि में होना, मंगल पर गुरु की दृष्टि, दूसरी कुंडली में समान स्थिति। अतः प्रश्न केवल यह नहीं कि 'दोनों में से कोई मांगलिक है या नहीं'। प्रश्न यह है कि वह स्थिति लागू भी होती है या नहीं, और दोनों कुंडलियाँ मिलकर उसे शांत करती हैं या नहीं।

दोनों कुंडलियों का समग्र विचार

कूटों के पश्चात् मैं ये बातें पढ़ता हूँ:

  • प्रत्येक कुंडली का सप्तम भाव और उसका स्वामी, साथ में शुक्र और गुरु, जिन्हें परंपरा विवाह का कारक मानती है।
  • दोनों का नवांश, जिसे विवाह के प्रश्न में परंपरा विशेष ध्यान से देखती है।
  • विवाह के बाद के आरंभिक वर्षों में दोनों की चलने वाली दशाएँ।
  • प्रत्येक कुंडली में स्वयं चंद्रमा का बल, क्योंकि छत्तीसों गुण उसी पर टिके हैं।

इससे कोई दूसरा अंक नहीं निकलता। इससे एक विचार निकलता है — दोनों के जीवन कहाँ सहजता से मिलेंगे, और तनाव कहाँ बैठने की संभावना है।

मिलान की बैठक का क्रम

  1. दोनों परिवार प्रत्येक व्यक्ति के तीन विवरण भेजते हैं — जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान — साथ में यह कि समय कहाँ से मिला।
  2. मैं दोनों कुंडलियाँ बनाता हूँ और उनकी जाँच करता हूँ। यदि कोई लग्न दो राशियों की संधि पर हो, तो विचार से पहले ही बता देता हूँ।
  3. आठों कूटों की गणना करता हूँ और कूटवार कुल अंक बताता हूँ।
  4. नाड़ी, भकूट और मंगल का विचार, शास्त्रों में लिखे अपवादों सहित, करता हूँ।
  5. दोनों के सप्तम भाव, नवांश और दशाएँ पढ़ता हूँ, और अंक को उसी विचार के भीतर रखता हूँ।
  6. जहाँ परंपरा किसी विशेष स्थिति के लिए शांति का निर्देश देती है, वहाँ बताता हूँ कि वह क्या है। उसे विवाह की शर्त अथवा उसके परिणाम की गारंटी के रूप में कभी नहीं रखा जाता।

मिलान किन बातों का निर्णय नहीं करता

मिलान दो व्यक्तियों से यह नहीं कहता कि विवाह करो, और न यह कि मत करो। वह संतान, आय अथवा दीर्घायु का वचन नहीं दे सकता, और मैं ऐसा कोई संकेत नहीं दूँगा। वह यह नहीं नापता कि दो लोग एक-दूसरे का कितना आदर करते हैं, उनकी भाषा और रुचि कितनी मिलती है, अथवा वे दो नगरों के बीच गृहस्थी बसा पाएँगे या नहीं। जहाँ दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते हैं, वहाँ भी मिलान का मूल्य है — वह बताता है कि कहाँ सावधान रहना है — किंतु वह उन वर्षों पर बैठा न्यायालय नहीं जो वे पहले ही साथ जी चुके हैं।

जब जन्म समय अनिश्चित हो

अष्टकूट को चंद्र नक्षत्र चाहिए, और चंद्रमा एक नक्षत्र में लगभग एक दिन रहते हैं। अतः अनुमानित समय से छत्तीस गुणों का अंक प्रायः नहीं बदलता — जब तक उस दिन चंद्रमा किसी नक्षत्र की सीमा के निकट न हों, और यह मैं जाँचता हूँ। लग्न, सप्तम भाव और मंगल का भाव — इन सबके लिए वास्तविक समय चाहिए। यदि किसी एक का समय अनिश्चित है, तो ईमानदार परिणाम यही है: चंद्र आधारित मिलान, तथा उन बातों की स्पष्ट सूची जो अभी पढ़ी नहीं जा सकतीं।

प्रत्यक्ष अथवा ऑनलाइन

मिलान में न अग्नि चाहिए, न सामग्री — केवल दो कुंडलियाँ और एक घंटे का एकाग्र ध्यान। सुलतानपुर और आसपास के जनपदों के परिवार प्रायः प्रत्यक्ष बैठने आते हैं। भारत के अन्य नगरों अथवा विदेश में बसे परिवार विवरण WhatsApp पर भेजते हैं, और बातचीत दूरभाष या वीडियो पर होती है। दोनों परिवार एक ही कॉल पर साथ जुड़ सकते हैं। दक्षिणा की बात WhatsApp पर होती है; ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था नहीं है। विवाह मुहूर्त, यदि बाद में चाहिए, एक पृथक् कार्य है, और वह उस नगर के लिए निकाला जाता है जहाँ विवाह संपन्न होगा।

दोनों परिवार क्या भेजें

  • प्रत्येक व्यक्ति की जन्म तिथि।
  • प्रत्येक का जन्म समय, और उसका स्रोत — प्रमाण-पत्र, चिकित्सालय का अभिलेख अथवा स्मृति।
  • प्रत्येक का जन्म स्थान, नगर अथवा ग्राम के रूप में।
  • पहले हुए किसी मिलान का अंक, और वह किस सॉफ्टवेयर या किस ज्योतिषी ने निकाला।
  • क्या किसी को पहले मांगलिक बताया गया है, और किसने बताया।

दोनों परिवारों से एक निवेदन

मिलान की बैठक में दोनों पक्षों को प्रायः यह भय रहता है कि कोई एक वाक्य सारी बात समाप्त कर देगा। इसलिए मैं आरंभ में ही कह देता हूँ कि यह बैठक किसी पक्ष को जिताने या हराने के लिए नहीं है। कुंडलियाँ दोनों परिवारों की संतानों का वर्णन करती हैं, उनके मान-सम्मान का नहीं। जहाँ कोई दोष दिखे, वहाँ उसे दूसरे पक्ष पर आरोप की भाँति नहीं, विचार के एक तथ्य की भाँति सुनिए। और जहाँ अंक अच्छे हों, वहाँ भी यह मत मानिए कि अब गृहस्थी स्वयं चल जाएगी। विवाह को टिकाने वाला धैर्य, संवाद और परस्पर आदर है; मिलान केवल यह बताता है कि इनकी आवश्यकता कहाँ अधिक पड़ेगी।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

विवाह के लिए कितने गुण मिलने चाहिए?
प्रचलित नियम है कि छत्तीस में से कम से कम अठारह गुण मिलें; उससे ऊपर के अंक मध्यम, उत्तम अथवा श्रेष्ठ कहे जाते हैं। इसे एक विधि की देहली मानिए, निर्णय नहीं। अठारह से कम अंक विवाह का निषेध नहीं करते, और ऊँचे अंक सुखी विवाह का वचन नहीं देते। दोनों कुंडलियों के सप्तम भाव, मंगल, नाड़ी, भकूट और आगामी दशाएँ फिर भी पढ़नी होती हैं।
क्या नाड़ी दोष होने पर विवाह नहीं करना चाहिए?
केवल इसी आधार पर नहीं। नाड़ी दोष का अर्थ है कि दोनों के चंद्र एक ही नाड़ी वर्ग में हैं, जिससे आठ में से शून्य अंक मिलता है। परंपरा इसे गंभीरता से लेती है, और इसके अपवाद भी लिखती है — जैसे नक्षत्र एक हो किंतु राशियाँ भिन्न हों। मैं दोष का नाम लेता हूँ, अपवाद लागू होता है या नहीं यह जाँचता हूँ, और उसे दोनों कुंडलियों के शेष विचार के साथ पढ़ता हूँ। निर्णय दोनों परिवारों का ही रहता है।
क्या कुंडली मिलान ऑनलाइन हो सकता है?
हाँ। मिलान के लिए केवल दोनों व्यक्तियों के सटीक जन्म विवरण चाहिए, हवन या सामग्री नहीं। दोनों परिवार जन्म तिथि, समय और स्थान WhatsApp पर भेजते हैं, और बातचीत दूरभाष अथवा वीडियो कॉल पर होती है — दोनों परिवार एक साथ जुड़ सकते हैं। सुलतानपुर के निकट के परिवार प्रत्यक्ष भी बैठ सकते हैं। दोनों रीतियों में विधि और सावधानी एक ही रहती है।
यदि एक मांगलिक हो और दूसरा नहीं, तो क्या करें?
पहले यह देखिए कि वह स्थिति लागू भी होती है या नहीं। मंगल दोष लग्न से, और प्रायः चंद्र तथा शुक्र से भी गिना जाता है, और शास्त्रों में इसके परिहार लिखे हैं — जैसे मंगल का स्वराशि या उच्च राशि में होना, अथवा उस पर गुरु की दृष्टि। दूसरी कुंडली में समान स्थिति अनेक परिहारों में से एक है, एकमात्र नहीं। किसी शास्त्र ने ऐसे विवाह का निषेध नहीं किया।
क्या प्रेम विवाह में भी कुंडली मिलान आवश्यक है?
उपयोगी है, किंतु निषेध के साधन के रूप में नहीं। छत्तीस गुण तब भी दोनों चंद्रमाओं की तुलना करते हैं, और नाड़ी, भकूट तथा मंगल का विचार तब भी आवश्यक है। जो दो लोग पहले से एक-दूसरे को जानते हैं, उनके लिए मिलान यह दिखाता है कि तनाव कहाँ बैठ सकता है और कहाँ सावधानी चाहिए। साथ जिए वर्षों पर वह निर्णय नहीं सुना सकता, और न उसका ऐसा उपयोग होना चाहिए।

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