ज्योतिष परामर्श

विवाह, गृह प्रवेश एवं संस्कारों हेतु शुभ मुहूर्त

विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण अथवा नए कार्य हेतु शुभ मुहूर्त — पंचांग तथा आपकी अपनी कुंडली के आधार पर।

पंचांग शुद्धि एवं संबंधित व्यक्ति की कुंडली के मिलान से चुना गया शुभ मुहूर्त — विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन अथवा नए कार्य हेतु। ऑनलाइन भी उपलब्ध।

इसमें सम्मिलित

  • पंचांग शुद्धि: तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण
  • संस्कार के समय की लग्न शुद्धि
  • संबंधित व्यक्ति की कुंडली से चंद्र बल एवं तारा बल
  • खरमास, चातुर्मास, होलाष्टक, पितृ पक्ष एवं गुरु-शुक्र अस्त का विचार
  • संस्कार-स्थल के नगर के अनुसार समय की गणना

मुहूर्त के लिए परिवार प्रायः ऐसे पूछते हैं मानो वह कहीं छपी हुई कोई तिथि हो, जिसे बस खोज लेना है — वर्ष भर के विवाह के शुभ दिनों की सूची, कोई शुभ गुरुवार, अथवा वह तिथि जिस पर पड़ोसी ने गृह प्रवेश किया था। मुहूर्त किसी सूची से उठाई गई तिथि नहीं है। वह एक काल-खंड है — कभी कुछ घंटों का, कभी उससे भी छोटा — जिसमें पंचांग शुद्ध हो, उदित लग्न उस कर्म के अनुकूल हो, और आकाश उस व्यक्ति के अनुकूल हो जिसके लिए संस्कार हो रहा है। एक ही दिन एक परिवार के लिए उचित और दूसरे के लिए अनुचित हो सकता है। मैं मुहूर्त संस्कार, व्यक्ति और स्थान — तीनों को देखकर चुनता हूँ।

मुहूर्त किन कार्यों के लिए

परंपरा किसी आरंभ से पूर्व मुहूर्त का विधान करती है — ऐसा संस्कार अथवा नया कार्य जिसके आरंभ को उसका बीज माना जाता है।

  • विवाह।
  • गृह प्रवेश, तथा निर्माण से पूर्व भूमि पूजन।
  • मुंडन (चूड़ाकर्म) और नामकरण।
  • अन्नप्राशन तथा विद्यारंभ — शिशु का प्रथम अन्न और प्रथम अक्षर।
  • व्यापार आरंभ — दुकान, प्रतिष्ठान अथवा कार्यालय का शुभारंभ।
  • वाहन, भवन अथवा भूमि का क्रय।

त्योहार की पूजा की तिथि पहले से निश्चित होती है। मुहूर्त तब चुना जाता है जब परिवार स्वयं यह तय करता है कि कोई कार्य कब आरंभ हो।

पंचांग के पाँच अंग

पंचांग का अर्थ ही है पाँच अंग। मुहूर्त को पहले इन पाँचों में शुद्ध होना चाहिए।

  1. तिथि — चंद्र दिवस। रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) तथा अमावस्या अधिकांश शुभारंभों के लिए त्यागी जाती हैं।
  2. वार — सप्ताह का दिन, और उसका स्वामी ग्रह।
  3. नक्षत्र — उस समय चंद्रमा का नक्षत्र। प्रत्येक संस्कार के अपने प्रशस्त नक्षत्र हैं। विवाह के लिए शास्त्र अन्य नक्षत्रों के साथ रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, अनुराधा और रेवती गिनाते हैं; गृह प्रवेश के लिए स्थिर और मृदु नक्षत्र, जैसे रोहिणी और तीनों उत्तरा।
  4. योग — सूर्य और चंद्र के संयोग से बनने वाले सत्ताईस योगों में से एक। व्यतीपात और वैधृति जैसे योग शुभ कार्यों में वर्जित हैं।
  5. करण — तिथि का आधा भाग। विष्टि करण, जिसे भद्रा कहते हैं, मांगलिक कार्यों में त्यागा जाता है।

लग्न शुद्धि — दिन के भीतर का समय

शुद्ध दिन अभी मुहूर्त नहीं है। दिन के भीतर उदित लग्न लगभग प्रत्येक दो घंटे में बदलता है, और कर्म उस लग्न में स्थिर किया जाता है जो उसके अनुकूल हो। मैं देखता हूँ कि केंद्र और त्रिकोण में शुभ ग्रह हों, और अष्टम भाव पाप ग्रहों से रिक्त हो। विवाह में मुहूर्त-लग्न से सप्तम और अष्टम भाव का विशेष सावधानी से विचार होता है। इसीलिए मुहूर्त प्रायः केवल तिथि नहीं, समय की अवधि भी बताता है — फेरे अमुक घड़ी से अमुक घड़ी के बीच।

वे काल जो शुभारंभ के लिए त्यागे जाते हैं

वर्ष के कुछ कालखंड विवाह, गृह प्रवेश और ऐसे ही आरंभों के लिए वर्जित माने जाते हैं, कोई एक दिन चाहे कितना भी शुद्ध दिखे।

  • खरमास — जब सूर्य धनु और मीन राशि में हों; लगभग एक-एक मास, एक शीत ऋतु में और एक वसंत में।
  • चातुर्मास — आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से कार्तिक की देव उठनी (प्रबोधिनी) एकादशी तक, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में माने जाते हैं। विवाह परंपरागत रूप से देव उठनी की प्रतीक्षा करते हैं।
  • होलाष्टक — होलिका दहन से पूर्व के आठ दिन।
  • पितृ पक्ष — पितरों को समर्पित पखवाड़ा, जो श्राद्ध का काल है, नए आरंभ का नहीं।
  • गुरु अथवा शुक्र का अस्त — जब बृहस्पति या शुक्र सूर्य के अति निकट होकर दृष्टि से ओझल हों। विशेषकर विवाह उनके पुनः उदय की प्रतीक्षा करता है।
  • अधिक मास — जिन वर्षों में अतिरिक्त चंद्र मास पड़ता है, वह मलमास भी इन कार्यों के लिए त्यागा जाता है।

परिवार कभी-कभी इन्हें भय की दृष्टि से देखते हैं। इन्हें पंचांग की अपनी लय के रूप में समझना अधिक उचित है — विश्राम का समय, पितरों का समय, संयम का समय। विवाह अथवा गृह प्रवेश के लिए मैं इनके भीतर मुहूर्त नहीं दूँगा। विवरण में क्षेत्रीय रीतियाँ भिन्न होती हैं, और आपके परिवार की जो रीति है, उसका मैं सम्मान करता हूँ।

मुहूर्त किसकी कुंडली से मिलाया जाता है

मुहूर्त केवल आकाश का शुद्ध दिन नहीं; वह उस व्यक्ति के लिए भी शुभ होना चाहिए जिसके लिए निकाला जा रहा है।

  • विवाह में वर और कन्या दोनों की चंद्र राशि; उत्तर भारतीय परंपरा के अनुसार कन्या के लिए गुरु बल और वर के लिए सूर्य बल।
  • गृह प्रवेश अथवा भूमि पूजन में गृहस्वामी — प्रायः वह जिसके नाम से संकल्प लिया जाता है।
  • मुंडन, नामकरण और अन्नप्राशन में शिशु।
  • व्यापार आरंभ में कार्य आरंभ करने वाला व्यक्ति, अथवा प्रमुख साझेदार।

उस व्यक्ति की जन्म राशि और जन्म नक्षत्र से मैं चंद्र बल और तारा बल देखता हूँ — उस दिन का चंद्रमा उनके जन्म चंद्र से शुभ स्थान पर है या नहीं, और उस दिन का नक्षत्र उनके जन्म नक्षत्र से अनुकूल गणना में पड़ता है या नहीं। जहाँ जन्म विवरण ज्ञात न हों, वहाँ परंपरा में कभी-कभी नाम राशि का प्रयोग होता है; तब मैं यह स्पष्ट बता देता हूँ।

स्थान का महत्व

सूर्योदय, तिथि का परिवर्तन और लग्न — तीनों इस पर निर्भर हैं कि संस्कार कहाँ हो रहा है। सुलतानपुर के लिए निकाला गया मुहूर्त मुंबई में वही घड़ी नहीं, और किसी दूसरे देश में तो निश्चय ही नहीं। जिस नगर में संस्कार वास्तव में होगा, वही बताइए। यदि विवाह एक नगर में है और परिवार दूसरे में रहता है, तो मुहूर्त विवाह-स्थल के नगर के लिए निकाला जाएगा।

मैं मुहूर्त कैसे चुनता हूँ

  1. आप बताते हैं — कौन सा संस्कार, किसके लिए, और किस नगर में।
  2. आप वह अवधि बताते हैं जो परिवार के लिए संभव है — कोई मास, कोई ऋतु, अथवा वे दिन जब भवन या सभागार तैयार होगा।
  3. मैं उस संस्कार के लिए वर्जित कालखंड अलग करता हूँ, और आपकी अवधि के भीतर पंचांग को दिन-प्रतिदिन जाँचता हूँ।
  4. शुद्ध दिनों को उस व्यक्ति की कुंडली से मिलाता हूँ जिसके लिए संस्कार है।
  5. चुने हुए दिन के भीतर लग्न स्थिर करता हूँ, और आपको दिन के साथ समय की अवधि बताता हूँ।
  6. यदि आपकी अवधि में कोई शुद्ध दिन नहीं मिलता, तो यह स्पष्ट कहता हूँ, और नियमों को खींचकर बिठाने के स्थान पर सबसे निकट का उचित दिन सुझाता हूँ।

मुहूर्त क्या नहीं करता

मुहूर्त सावधानी से चुना गया उचित आरंभ है, गारंटी नहीं। वह सुखी विवाह, किसी बिक्री, किरायेदार अथवा व्यापार के परिणाम को सुनिश्चित नहीं करता। जल्दबाज़ी और कलह में किया गया संस्कार अच्छे मुहूर्त में भी अच्छा आरंभ नहीं बनता; साधारण-सी अवधि में श्रद्धा और शांति से किया गया संस्कार प्रायः किसी प्रसिद्ध तिथि की भीड़ से श्रेष्ठ होता है। इसी कारण मैं 'वर्ष की सर्वश्रेष्ठ तिथियों' की कोई सूची प्रकाशित नहीं करता — आपके लिए उचित तिथि आप पर निर्भर है।

प्रत्यक्ष अथवा ऑनलाइन

मुहूर्त में न सामग्री चाहिए, न अग्नि; अतः यह दूर रहकर भी सहजता से हो जाता है। परिवार विवरण WhatsApp पर भेजते हैं, और जहाँ विकल्पों पर विचार करना हो, वहाँ दूरभाष या वीडियो पर बात होती है। सुलतानपुर और निकट के जनपदों के परिवार प्रत्यक्ष भी बैठ सकते हैं। यदि परिवार संस्कार भी संपन्न करवाना चाहे, तो उसकी व्यवस्था अलग से तय होती है। दक्षिणा की बात WhatsApp पर होती है; ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था नहीं है।

मुहूर्त के लिए आपसे क्या चाहिए

  • संस्कार अथवा कार्य, और वह किसके लिए है।
  • उस व्यक्ति की जन्म तिथि, समय और स्थान — विवाह में वर और कन्या दोनों के।
  • वह नगर जहाँ संस्कार होगा।
  • वह अवधि जो परिवार के लिए संभव है, और कोई निश्चित बाधा — जैसे सभागार की उपलब्धता, कार्यालय से अवकाश अथवा यात्रा।

शुभ घड़ी और घर की तैयारी

मुहूर्त निकल जाने के बाद परिवार का ध्यान प्रायः केवल घड़ी पर टिक जाता है, और तैयारी पीछे छूट जाती है। मेरा निवेदन रहता है कि जिस समय की प्रतीक्षा इतने विचार से की गई, उस समय घर का वातावरण भी उसके योग्य हो। सामग्री समय से पहले जुट जाए, संकल्प लेने वाले व्यक्ति उपस्थित हों, और घर में कलह या जल्दबाज़ी न हो। मुहूर्त के कुछ मिनट आगे-पीछे हो जाने की चिंता में संस्कार की श्रद्धा न खोइए; शास्त्र भी भाव को प्रधान मानते हैं। उचित समय और शांत मन — दोनों मिलकर ही किसी आरंभ को शुभ बनाते हैं।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या वर्ष भर के विवाह मुहूर्त की सूची मिल सकती है?
मैं कोई सामान्य सूची नहीं देता। छपी हुई सूचियाँ वे दिन बताती हैं जब पंचांग शुद्ध है, किंतु विवाह मुहूर्त को वर और कन्या दोनों की चंद्र राशि के अनुकूल भी होना चाहिए, और उसका लग्न विवाह-स्थल के नगर के लिए स्थिर करना होता है। परिवार के लिए संभव ऋतु बताइए; मैं उसी के भीतर आप दोनों की कुंडलियों के अनुकूल शुद्ध दिन निकालूँगा।
खरमास और चातुर्मास में विवाह क्यों नहीं होते?
खरमास में सूर्य धनु अथवा मीन राशि में होते हैं। चातुर्मास में, देवशयनी एकादशी से देव उठनी एकादशी तक, भगवान विष्णु योगनिद्रा में माने जाते हैं। परंपरा दोनों कालों को नए आरंभ का नहीं, संयम और भक्ति का समय मानती है; इसलिए विवाह और गृह प्रवेश प्रतीक्षा करते हैं। विवरण में क्षेत्रीय रीतियाँ भिन्न हैं, और मैं आपके परिवार की रीति का पालन करता हूँ।
क्या विदेश में रहने वाले परिवार के लिए मुहूर्त ऑनलाइन निकल सकता है?
हाँ। मुहूर्त के लिए जन्म विवरण और संस्कार का स्थान चाहिए, सामग्री नहीं। विवरण WhatsApp पर भेजिए, और उस नगर का नाम बताइए जहाँ संस्कार वास्तव में होगा। तिथि, सूर्योदय और लग्न उसी नगर के लिए गणित किए जाते हैं, किसी भारतीय कैलेंडर से उतारे नहीं जाते। जहाँ विकल्पों पर विचार करना हो, वहाँ दूरभाष या वीडियो पर बात होती है।
यदि जिस महीने में चाहिए उसमें शुभ मुहूर्त न हो तो?
तब मैं यह स्पष्ट कह देता हूँ। कभी चातुर्मास या खरमास जैसा वर्जित काल पूरी अवधि को ढक लेता है; कभी शुद्ध दिन उस व्यक्ति की कुंडली के अनुकूल नहीं होते। नियमों को खींचने के स्थान पर मैं सबसे निकट का उचित दिन सुझाता हूँ। जहाँ तिथि सचमुच नहीं बदल सकती, वहाँ बताता हूँ कि परंपरा क्या स्वीकार करती है और क्या नहीं; निर्णय परिवार का रहता है।
क्या वाहन ख़रीदने या दुकान खोलने के लिए मुहूर्त चाहिए?
अनेक परिवार लेते हैं, और परंपरा किसी भी नए आरंभ के लिए इसका समर्थन करती है। इसकी विधि विवाह से सरल है — शुद्ध तिथि, उपयुक्त नक्षत्र और वार, भद्रा का त्याग, और क्रेता अथवा स्वामी की कुंडली से दिन का मिलान। मुहूर्त एक सावधान आरंभ है। वह बिक्री, सुरक्षा अथवा लाभ की गारंटी नहीं देता, और न उसे ऐसे बेचा जाना चाहिए।
अवधि
अवसर अनुसार
आयोजन स्थल
प्रत्यक्ष अथवा ऑनलाइन (वीडियो / WhatsApp)
दूरभाष
+91 94547 82346
WhatsApp पर तिथि पूछें

विवाह, गृह प्रवेश एवं संस्कारों हेतु शुभ मुहूर्त

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