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दुबई के फ्लैट में अहोई अष्टमी 2026 — छलनी, खिड़की, और काम का रविवार

दुबई के फ्लैट में अहोई अष्टमी 2026 — छलनी, खिड़की, और काम का रविवार

प्रकाशित: 21 अक्टूबर 2026 · आचार्य कृष्ण कांत श्रीमुख शांडिल्य जी महाराज · 7 मिनट का पाठ

दुबई में अहोई अष्टमी एक फ्लैट की सायं है। माता को, प्रायः परिवार के समूह से, पहले ही कह दिया गया होता है कि व्रत चाँद तक जाता है, उसके बिना बच्चे असुरक्षित हैं, और आकाश के लिए दिल्ली का चित्र पर्याप्त है। सायं वास्तव में, जुमेराह में या डिस्कवरी गार्डन्स में या अल नहदा की किसी मीनार में, इससे छोटी और अधिक सटीक है। काम का रविवार। रसोई की छलनी। दीप जिसे संसूचक सह ले। तारे जिन्हें नगर की अपनी रोशनी के पार ढूँढना पड़ता है। जिस आकाश को आप देख सकते हैं उसे जल, फिर भोजन।

यह मैं 21 अक्टूबर 2026 को सुलतानपुर में लिख रहा हूँ। मैं दुबई में नहीं हूँ और वहाँ कमरा नहीं रखता। जिस पंचांग पर मैं चलता हूँ, व्रत रविवार 1 नवम्बर 2026 है। करवा चौथ, उसी कृष्ण पक्ष का चन्द्र-व्रत, गुरुवार 29 अक्टूबर था, और इस स्थल पर एक अलग लेख दुबई के फ्लैट के उस गुरुवार का है। एक और लेख अमीरातों भर की उसी अहोई का है — अबू धाबी, शारजाह, एक ही 'UAE समय' की भूल। दीवाली की लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवम्बर है। यह पृष्ठ कमरा है। देश की घड़ी चाहिए तो अमीरात वाला लेख पढ़िए, फिर खिड़की पर लौट आइए।

रविवार प्रातः विद्यालय की यात्रा है

दुबई का सप्ताहान्त शुक्रवार और शनिवार था। रविवार 1 नवम्बर विद्यालय का दिन है और कार्यालय का दिन। बच्चे निकलते हैं। आप भी उनके साथ निकल सकते हैं। प्रातः से घर में माता, आँगन की दीवार पर आकृति — यह भारतीय चित्र लिफ्ट में नहीं बचता। चादर शनिवार रात बिछा दीजिए। छलनी धो दीजिए। चित्र चुन लीजिए, क्योंकि किराये के फ्लैट की दीवार गेरु से रंगने के लिए आपकी नहीं है। भोजन निश्चय कर लीजिए, ताकि रविवार सायं यातायात के बाद पुरी की खोज न हो।

व्रत, जिन घरों ने मुझे सिखाया, सूर्योदय से आरम्भ होता है। करवा की सरगी नहीं है, जब तक सास की रीति इस दिन में आकर मिली न हो। यदि जेबेल अली के स्थल या डीआईएफसी की मेज़ से पहले खाना आवश्यक हो, तो सूर्योदय से पहले बैठकर खा लीजिए। फिर अपनी ही नियमितता के अनुसार जल लीजिए या मत लीजिए। गर्भवती, अस्वस्थ, या गर्मी की इस आदत से नई स्त्री का दुबई की दोपहर में निर्जला व्रत अधिक कठोर नहीं है। वह सायं को चिकित्सालय में बिताने का तरीका है। देह माँगे तो खाइए। तारों के लिए घर में रहिए।

खिड़की ही आँगन है

सुलतानपुर में छलनी उस गली में उठती है जो अँधेरी हो जाती है। दुबई की मीनार में आकाश काँच का एक आयत है, और काँच में नगर के दीप हैं। कमरे की बत्तियाँ बुझाइए। खिड़की के किनारे खड़े होइए, चमक के बीच में नहीं। एक मिनट दीजिए। पहला तारा दर्शन है। जो सूचना कहे 'तारा दर्शन 5:40 खाड़ी समय', वह संकेत है, इस बात की अनुमति नहीं कि आकाश अभी गुलाबी हो और आप खा लें। नवम्बर के आरम्भ की दुबई की सायं खाड़ी के समय की देर दोपहर है। मैं अक्टूबर में मिनट इस पृष्ठ पर नहीं खोदूँगा। रविवार प्रातः दुबई पर सेट पंचांग खोलिए, सूर्यास्त लिखिए, और उसके बाद अपनी आँख पर भरोसा कीजिए।

यदि आप शारजाह में रहते हैं और दुबई में काम करते हैं, तो छलनी उस स्थान की है जहाँ आप खड़े होंगे। बैग में दुबई की पत्रिका और खिड़की पर शारजाह का आकाश एक साथ मत रखिए। इस स्थल का एक अलग लेख अमीरातों और उनके भिन्न सूर्यास्तों पर चलता है। उसे पढ़िए। फिर एक खिड़की पर घर आइए।

धुआँ-संसूचक विधि का अंग है, चाहे पद्धति उसका नाम ले या न ले। छोटा दीप, परदों से दूर, ऐसी छत के नीचे जो पहले से चिन्तित न हो — वही दीप है। चित्र के लिए बड़ी ज्वाला वह तरीका है जिससे सायं अलार्म बने और चौकीदार से बहस हो। यदि भवन ने खुली आग मना की है, तो लॉबी की कथा मत बनिए। चित्र, जल, छलनी, और तारे उस बालकनी से जिसकी प्रबन्ध अनुमति दे। व्रत आकाश और ध्यान है। ज्वाला का माप नहीं।

चादर पर क्या रखा जाए

फर्श पर सफेद चादर उस बैठक में भी समाती है जिसका आँगन नहीं। पीतल या इस्पात की थाल। छलनी। जल का कटोरा। अहोई माता का चित्र, ऐसा टिकाएँ कि सोफ़े पर चढ़े बिना दिखे। गेंदा हो तो हो। भोजन — पूरी, हलवा, फल — जो रविवार की रसोई कार्य-दिन के बाद सच में पूरा कर सके। किसी के खाने से पहले रख दीजिए। विद्यालय से लौटे बच्चे बैठ सकते हैं। उन्हें उपवास का आदेश नहीं। माता जल चढ़ाने के बाद खाए और उन्हें परोसे — यही पंक्ति मुझे अब भी अच्छी लगती है।

मीनार के पड़ोसी कुछ नहीं सुनेंगे यदि आप शान्त रखें, और दीवार के पार पूरा भजन सुनेंगे यदि न रखें। अहोई जागरण नहीं है। एक दीप, कथा कहें तो एक स्वर, खिड़की उतनी ही खुली जितनी धूल आने दे। असुविधा हो तो बगल के फ्लैट को बता दीजिए। शिष्टाचार व्रत को पतला नहीं करता।

तारे, वह चाँद नहीं जिसे आपकी माता पहले ही खींच चुकी हैं

कुछ दिन पहले का करवा चाँद की प्रतीक्षा में था। अहोई, साधारण घर में, नहीं करती। छलनी से तारों की ओर जल, फिर भोजन। इस तिथि को चाँद देर से निकलता है। कुछ परिवार, उनमें राधाकुण्ड की रीति, उसकी प्रतीक्षा करते हैं। यदि लखनऊ में आपकी माता प्रतीक्षा कर रही हैं, तो वह अपने घर में हैं। आप अपने में। उनकी तस्वीर आ गई इसलिए आधी रात तक मत बैठिए, और उनके मिनट पर व्रत मत खोलिए। खाड़ी का समय और दुबई का रेखांश दोनों बीच में हैं। इस स्थल का एक अलग पृष्ठ करवा के लिए यही बात अधिक लम्बाई में कहता है — दिल्ली की घड़ी में से डेढ़ घण्टे घटाना दुबई का आकाश नहीं है।

यदि मरीना पर बादल या धुन्ध हो, तो प्रतीक्षा कीजिए जब तक तारा ईमानदारी से न हो। यदि काँच कभी काफी अँधेरा न हो, तो बालकनी पर जाइए या प्रांगण के उस कोने में जो साइन से मुँह मोड़े हो। अनुप्रयोग के बजने पर खाना, जबकि आकाश की रोशनी में अभी पुस्तक पढ़ी जा सकती हो — यही भूल मैं अगली प्रातः सबसे अधिक सुनता हूँ।

कथा, एक बार, बिना धमकी के

कथा माता के शोक की है और सायं के व्रत की, और एक कथन की जिसमें जो खोया वह लौटता है। यदि आप कहें तो मैं उसे सीधे सम्भाषण पर संक्षेप में, हिन्दी में, कहूँगा। फिर वह वाक्य कहूँगा जिसके बिना मैं कहूँगा ही नहीं। यह वचन नहीं है कि आपका बच्चा बीमार नहीं पड़ेगा, सड़क पर चोट नहीं खाएगा, विद्यालय में उत्तीर्ण होगा, या जन्मेगा ही। बेटियाँ और बेटे दोनों घर के बच्चे हैं। पुरानी वाणी पुत्र कहती थी। वह वाणी श्रेणी नहीं है जिसे मैं रखना चाहूँ। जो स्त्री डर कर अहोई रखती है, उसे बुरा सिखाया गया है। नियमितता की तरह रखिए, या मत रखिए। बीमा की तरह मत रखिए।

जो सप्ताह बाद में आता है

धनतेरस शुक्रवार 6 नवम्बर है, लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवम्बर, फिर एक कार्य-सप्ताह का अन्त और फिर विद्यालय तथा कार्यालय वाला रविवार। अहोई की सायं दीवाली की सजावट मँगाने में मत गँवाइए। 1 तारीख को जिस संसूचक की आप परीक्षा करते हैं, उसी के साथ 8 तारीख को रहना है। एक छोटा दीप, जो शान्त सिद्ध हो चुका हो, सोमवार को जल्दबाज़ी में खरीदे प्रकाश के बक्से से अधिक मूल्य रखता है। यदि दीवाली पर अतिथि आ रहे हों, तो अहोई उनकी रात नहीं है। 1 नवम्बर का रविवार उनके लिए रखिए जो फ्लैट में सोते हैं।

यदि उस सायं फ़ोन पर मुझे चाहिए

पहली पंक्ति में क्षेत्र लिखिए — जुमेराह, अल नहदा, डिस्कवरी गार्डन्स, बुर दुबई, दीरा, मरीना, या शारजाह यदि खिड़की वहीं है। WhatsApp, हिन्दी या अंग्रेज़ी। इस स्थल पर भुगतान नहीं। यदि कथा के छोटे सीधे पठन के लिए दक्षिणा कही जाए, तो वह रविवार से पहले कही जाए, तारे के बीच में नहीं। मैं सुलतानपुर में हूँ। यात्रा तब जब यात्रा सच में निश्चित हो। परिवार भारत आए तो वहीं बैठता हूँ। सीधा सम्भाषण वह रूप है जो ऐसे फ्लैट से मेल खाता है जिसमें मैं प्रवेश का दिखावा नहीं करूँगा। अधिकांश वर्षों माता को सम्भाषण की आवश्यकता ही नहीं। छलनी और खिड़की पर्याप्त हैं।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

दुबई में 2026 की अहोई अष्टमी किस दिन है?

रविवार 1 नवम्बर 2026। यह विद्यालय का दिन है और काम का दिन। उस प्रातः दुबई का सूर्यास्त दुबई के पंचांग पर देखिए।

तारा कहाँ देखूँ?

जिस फ्लैट में आप हों, उसकी खिड़की या बालकनी से, कमरे की बत्तियाँ बुझाकर। लखनऊ का चित्र दर्शन नहीं है।

संसूचक बज जाए तो?

छोटी ज्वाला, या ज्वाला नहीं। चित्र, जल और तारे व्रत हैं। अलार्म इस बात का चिह्न नहीं कि सायं अधिक सच थी।

क्या बच्चे व्रत रखें?

नहीं। वे बैठ सकते हैं। व्रत माता का है, और केवल तब जब उसकी देह तारों तक ठहर सके।

क्या यह UAE वाले लेख के समान है?

नहीं। वह देश है और कई सूर्यास्त। यह फ्लैट है।

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