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गणेश चतुर्थी 2026 — स्थापना, दस दिन, और शोर के बिना विसर्जन

गणेश चतुर्थी 2026 — स्थापना, दस दिन, और शोर के बिना विसर्जन

प्रकाशित: 3 सितम्बर 2026 · आचार्य कृष्ण कांत श्रीमुख शांडिल्य जी महाराज · 6 मिनट का पाठ

गणेश चतुर्थी घर या मंडल में गणेश की स्थापना है, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर, और उसके बाद विसर्जन — कई घरों में उसी दिन, सार्वजनिक उत्सव में अनंत चतुर्दशी पर। 2026 में चतुर्थी सोमवार, 14 सितम्बर है। अनंत चतुर्दशी, जब महाराष्ट्र की बड़ी मूर्तियाँ और सार्वजनिक पंडाल जल की ओर जाते हैं, शुक्रवार, 25 सितम्बर है। इन दो तिथियों के बीच दस दिन हैं जिन्हें परिवार शांत रख सकता है, या गली नागरिक उत्सव की तरह। दोनों एक त्योहार तभी हैं जब मूर्ति अतिथि की तरह आई और अतिथि की तरह लौटाई गई। लाउडस्पीकर और प्लास्टर से भरी नदी शास्त्र नहीं।

स्थापना से ग्यारह दिन पहले लिख रहा हूँ, क्योंकि तब प्रश्न उपयोगी होते हैं: कौन सी मिट्टी, कौन सी दिशा, काम वाले घर दस दिन रख सकते हैं, एक दिन का विसर्जन क्या छोटा है, और गणेश 'विघ्न हरण' नारा हैं या संकल्प। नीचे घर के लिए है। मंडल की अपनी समिति है। ज्योतिषी वह समिति नहीं।

2026 की तिथियाँ

स्थापना: सोमवार, 14 सितम्बर 2026, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी। मूर्ति लाने का मुहूर्त उस सुबह के स्थानीय पंचांग से — सामान्यतः सूर्योदय के बाद, उस नगर के निषिद्ध काल छोड़कर, 'जब मूर्तिकार पहुँचा दे' नहीं। मूर्ति देर से आए तो बिठाइए, जल और दूर्वा दीजिए, अगली स्वच्छ खिड़की में पूर्ण स्थापना कीजिए। रिश्तेदारों की भीड़ में जल्दबाज़ी प्राण-प्रतिष्ठा मत कीजिए।

डेढ़ दिन या तीन दिन की गृह मूर्ति का विसर्जन उसी संध्या या तृतीय, पंचम, सप्तम दिन हो सकता है, जैसा संकल्प में कहा। सार्वजनिक विसर्जन, और अधिकांश खोज जिसका अर्थ लेती है, अनंत चतुर्दशी: 25 सितम्बर 2026। हरतालिका तीज इस वर्ष चतुर्थी की सिविल तारीख पर है, 14 सितम्बर। ये भिन्न व्रत हैं। संकल्प मत मिलाइए।

इस उत्सव में गणेश कौन हैं

गणेश कार्य के आरंभ में पूजे जाते हैं — विद्या, यात्रा, विवाह, कथा — क्योंकि परंपरा उन्हें उस विघ्न का हरण करने वाला कहती है जो देहली पर भ्रम है। पौराणिक जन्म, गजमुख, टूटी दाढ़, मूषक, मोदक — उसी पद की प्रतिमा-भाषा हैं। चतुर्थी उनकी जयंती है जैसे घर रखता है: पार्वती के पुत्र, निश्चित प्रवास पर आमंत्रित, खिलाए, गाए, फिर जल तक पहुँचाए ताकि घर यह न सोचे कि अतिथि फर्नीचर है।

वे सोसाइटी के शुभंकर नहीं। विसर्जन यात्रा जो एम्बुलेंस रोके, या मूर्ति इतनी बड़ी कि बिना क्रेन और पुलिस बैंड के डूब न सके, अतिथि की व्याकरण छोड़ चुकी। यह साफ कहता हूँ क्योंकि हर वर्ष त्योहार के बाद वही चित्र आते हैं, रंग से भरे तालाबों के। वह भक्ति थोड़ी बिगड़ी नहीं। तिलक लगा नागरिक कचरा है।

मिट्टी, प्लास्टर नहीं

गृह मूर्ति मिट्टी की हो — शाडू मिल सके तो — रंग हो तो प्राकृतिक, इतनी छोटी कि दो लोग उठा सकें। प्लास्टर ऑफ पेरिस घुलता नहीं। तालाब की तली पर रंग के साथ बैठता है। कई नगर अब मिट्टी माँगते हैं, निर्धारित टैंक हैं। उन्हें इस्तेमाल कीजिए। घर के टब में विसर्जन, फिर वह जल पौधे पर — छोटी मूर्ति का पूर्ण विसर्जन है। यह छोटी विधि नहीं। फ्लैट के नाप की विधि है।

दूर्वा, लाल जपा या गेंदा, और मोदक — जिन सूचियों से मैं सिखा, ये उनके हैं। इक्कीस मोदक कुछ घर रखते हैं; श्रद्धा से बनी एक थाली, ऑर्डर करके न खाए इक्कीस से श्रेष्ठ। गणेश बेकरी के बिल से नहीं गिने जाते।

उस घर में स्थापना जहाँ काम भी है

मूर्ति पूर्व या पश्चिम मुख, चौकी पर, भूमि पर नहीं, धरन के नीचे नहीं यदि घर पहले से बचता है। कलश, आम्रपल्लव हों तो, दीप जो प्रवास भर बिना आग के खतरे के रह सके। काम वाले परिवार को प्रातः-संध्या आरती काफी। 'दस दिन लगातार कार्यक्रम' मंडल का काम है। जो घर दिन में दो बार दीप जलाए, फल चढ़ाए, दस मिनट बैठे, उसने चतुर्थी रखी।

दस दिन न रख सको तो डेढ़ रखो — 14 तारीख सूर्योदय के बाद स्थापना, अगली संध्या विसर्जन — और संकल्प में कह दो। अतिथि के शास्त्र में वह ईमानदारी है जो निमंत्रण के समय तिथि नामने में थी।

चतुर्थी व्रत

चतुर्थी व्रत रखने वाले चंद्रोदय तक उपवास, फिर चंद्र को अर्घ्य, फिर भोजन। गणेश चतुर्थी और मासिक संकष्टी संबंधी हैं, जुड़वाँ नहीं; संकष्टी के नियम जयंती पर बिना यह देखे मत लगाइए कि घर पहले से क्या करता है। रुग्ण, गर्भवती, बच्चे, भारी मशीनों वाले काम वाले निर्जल दिन में लज्जित न किए जाएँ। मोदक चढ़ाइए, दीप रखिए, काम पर जाइए। गणेश से जो विघ्न हटाने को कहा जाता है, वह प्रायः छूटा हुआ भोजन नहीं।

विसर्जन किस लिए है

विसर्जन आमंत्रित रूप की उस तत्व में वापसी है जिससे मिट्टी आई। मार्ग का गान विदाई है, रैली नहीं। टैंक वाले नगर में टैंक। बिना टैंक के टब और पौधा। मूर्ति को भाटे की रेत पर अगली सुबह के चित्र के लिए मत छोड़िए। प्लास्टर को नदी में डालकर गंगा को अर्घ्य मत कहिए। गंगा हमारी भक्ति की नाली नहीं।

विसर्जन के बाद चौकी खाली, दीप साधारण स्थान पर, घर सप्ताह में लौटा। अतिथि गए। वह रिक्तता विधि का अंग है। उसे तुरंत खरीदारी से भरना दूसरा त्योहार है।

ज्योतिष, नारे के बिना

कथा या पूजा के संकल्प के शीर्ष पर मैं गणेश का स्मरण करता हूँ। यही पद है। चतुर्थी अनुबंध पर हस्ताक्षर, वाहन खरीद, मुकदमा दायर करने का कंबल मुहूर्त नहीं। मुहूर्त चाहिए तो कुंडली और कार्य लाइए। 'गणेश विघ्न हरण हैं, अतः यह मंगलवार ठीक है' विचार नहीं। धोती पहना लोकोक्ति है।

जो दस दिन बिना कुंडली के संभालते हैं: अध्ययन का आरंभ, बच्चे के पहले अक्षर, उपेक्षित स्थान की सफाई, एक सप्ताह प्रातः दीप। ये देहलियाँ हैं। उन पर वे बैठते हैं।

वह गृह विधि जो पूरी हो

  • 14 सितम्बर, स्थानीय प्रातः खिड़की के बाद: स्नान, चौकी, मूर्ति, दूर्वा, दीप, मोदक, प्रवास के दिनों का संकल्प।
  • दिन में दो आरती, फल या पका सात्विक भोग, पर्दे के पास दीप नहीं।
  • दस दिन हों तो अनंत चतुर्दशी, 25 सितम्बर, मिट्टी-कानूनी जल या घरेलू टैंक में विसर्जन।
  • डेढ़ या तीन दिन हों तो संकल्प की संध्या, वही विधि।
  • विसर्जन के बाद: चौकी साफ, अतिथि को शब्द से धन्यवाद, साधारण भोजन।

इस पक्ष के प्रश्न

गणेश चतुर्थी 2026 कब है?

सोमवार, 14 सितम्बर। अनंत चतुर्दशी के साथ सार्वजनिक विसर्जन शुक्रवार, 25 सितम्बर।

क्या मूर्ति दस दिन रखनी अनिवार्य है?

नहीं। स्थापना पर प्रवास नाम दीजिए। डेढ़, तीन, पाँच, सात, दस — सब चलते हैं। नामे गए प्रवास की ईमानदारी मंडल से मेल खाने से बड़ी है।

क्या घर का विसर्जन मान्य है?

हाँ, छोटी मिट्टी मूर्ति के लिए। मूर्ति गलने के बाद जल पौधे पर — पूर्ण है। नदी में प्लास्टर इसलिए श्रेष्ठ नहीं कि वह 'सार्वजनिक' था।

क्या चतुर्थी पूजा से व्यापार शुरू हो?

कार्य के आरंभ में गणेश का नाम लिया जा सकता है। स्वयं मुहूर्त नहीं। मुहूर्त के लिए कुंडली और उस कार्य का पंचांग चाहिए।

विदेश में नदी नहीं।

मिट्टी की मूर्ति, बड़ा कटोरा, पौधा। फ्लैट का विसर्जन है, और काफी है।

मोदक, दूर्वा, और घर का भोग

मोदक गणेश का प्रिय भोग इसलिए नहीं कि हलवाई की दुकान त्योहार पर खुलती है, बल्कि इसलिए कि परंपरा उन्हें मधु और चावल के इस रूप से जोड़ती है। घर में पके हुए मोदक, या सादे फल, उस थाली से श्रेष्ठ हैं जो रात भर फ्रिज में पड़ी रहे। दूर्वा तीन या पाँच पत्तियों का गुच्छा, धुली हुई, मूर्ति के चरणों पर — यही पत्र इस चतुर्थी का है। लाल पुष्प हो तो जपा; न हो तो गेंदा। सूची पूरी न होने से पूजा रुकती नहीं। अधूरी सूची और जलता दीप, बिना दीप की पूर्ण सूची से बड़ा है।

बालक को मूर्ति के सामने बैठाना, आरती का घंटा पकड़ाना, विसर्जन से पूर्व नमस्कार सिखाना — ये दस दिनों का वह पाठ है जो कुंडली नहीं पढ़ाती। गणेश विघ्न हरण तब भी हैं जब विघ्न केवल यह हो कि बच्चा पूजा को भीड़ समझे, न कि अतिथि।

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